गायत्री मंत्र को बोलने में आलस्य नहीं होना चाहिए, जितनी बार भी बोला जाता है। ईश्वर सभी को सुनता है इसलिए इसको भी सुनता है। जिस दिन कर्मों के हिसाब से इस गायत्री मंत्र की प्रार्थना को स्वीकार कर देगा तो आलोकिक बुद्धि हो जाएगी। यही तो इसमें...
ईश्वर से यह प्रार्थना है कि वह यज्ञ को पूर्ण करें। संसार को तो मैं कब का त्याग चुका हूँI बस, धर्माचरण हैI शिष्यों की देखभाल करनी हैI बरसों से हम अंदर ही हैंI पहले भी केवल यज्ञ के लिए ही बाहर आते थेI ओ३म् आ याह्यग्ने समिधानो अर्वाङिन्द्रेण देवैः सरथं तुरेभिः। ...
एक मंत्र रोज जरूर सुना करो। यह भगवान ने जो ज्ञान दिया कि जो मनुष्य माता पिता के साथ अच्छे कर्म करता है, जो मनुष्य विद्वान के जैसे कर्म करता है.. यहाँ यह ज्ञान है कि विद्वान की तरह जब कर्म करेगा उसको विद्वान से ज्ञान मिलेगा। विद्वान तो आचरण को मानते हैं। जो आप...
ओ३म् स रोचयज्जनुषा रोदसी उभे स मात्रोरभवत्पुत्र ईड्यः। हव्यवाळग्निरजरश्चनोहितो दूळभो विशामतिथिर्विभावसुः॥ (ऋग्वेद मंत्र ३/२/२) ईश्वर ने यहां यह ज्ञान दिया है कि ब्रह्मचर्य रखकर विद्या और सुशिक्षा प्राप्त करो। ब्रह्मचर्य पर बड़ा ध्यान रखो। जो पुस्तक मैंने...
ओ३म् आ नो गहि सख्येभिः शिवेभिर्महान्महीभिरूतिभिः सरण्यन्। अस्मे रयिं बहुलं संतरुत्रं सुवाचं भागं यशसं कृधी नः॥ (ऋग्वेद मंत्र ३/१/१९) भावार्थ: यदि मनुष्यः सुमित्राणि प्राप्नुयात्तर्हि तं महती श्रीः कथं न प्राप्नुयात्। इस मंत्र में भगवान कह रहा है कि अगर...