स्वामी राम स्वरूप जी, योगाचार्य, वेद मंदिर (योल) (www.vedmandir.com) पृच्छे तदेनो वरुण दिदृक्षूपो एमि चिकितुषो विपृच्छम्। समानमिन्मे कवयश्चिदाहुरयं ह तुभ्यं वरुणो हृणीते॥ (ऋग्वेद ७/८६/३) (वरुण) हे परमात्मा! (पृच्छे) मैं आप से पूछता हूँ कि (तत्) वह (एनः) पाप कौन से हैं...
Swami Ram Swarup, YogacharyaAfter completion of the time of final destruction, God creates universe and simultaneously originates the knowledge of four Vedas in the heart of four Rishis because in the absence of vedic knowledge, human-beings would remain ignorant and...
स्वामी राम स्वरूप जी, योगाचार्य, वेद मंदिर (योल) (www.vedmandir.com) ओ३म् धीरा त्वस्य महिना जनूंषि वि यस्तस्तम्भ रोदसी चिदुर्वी । प्र नाकमृष्वं नुनुदे बृहन्तं द्विता नक्षत्रं पप्रथच्च भूम ॥ (ऋग्वेद ७/८६/१) (यः) जो परमात्मा (वि) अच्छी तरह (रोदसी) द्युलोक (चित्) और...
स्वामी राम स्वरूप जी, योगाचार्य, वेद मंदिर (योल) सम्राळन्यः स्वराळन्य उच्यते वां महान्ताविन्द्रावरुणा महावसू। विश्वे देवास: परमे व्योमनि सं वामोजो वृषणा सं बलं दधुः॥ (ऋग्वेद ७/८२/२) अर्थ – मंत्र में भी परमात्मा ने राजधर्म का उपदेश किया है| राजपुरुष उन्हें कहते...
स्वामी राम स्वरूप जी, योगाचार्य, वेद मंदिर (योल) (www.vedmandir.com) उत्सूर्या बृहदर्चींष्यश्रेत्पुरु विश्वा जनिम मानुषाणाम् । समो दिवा ददृशे रोचमान: क्रत्वा कृतः सुकृतः कर्तृभिर्भूत् ॥ (ऋग्वेद ७/६२/१) (सूर्य:) सब संसार के उत्पादक परमात्मा का (बृहत् अर्चींषी) बड़ी...