Anupam: गुरुजी सादर प्रणाम।गुरूजी हवन करते समय जो तीन समिधा मंत्रो के माध्यम से हवनकुंड मे रखी जाती है तो दूसरी समिधा रखने में 2 मंत्र क्यो बोले जाते है जबकि पहली व तीसरी समिधा 1,1मंत्र बोलकर रखी जाती है।
Swami Ramswarup: Blessings beti. Jaroorat ke mutabik doosree samidha ke liye do mantron ka nishchay mantra drishta rishiyon ne kiya hai jo uchit hai. Jab kabhi aap yahaan aayeinge to detail mein samjhayeinge.

Vikas: आचार्य जी प्रणाम आपने मेरे जैसे पापी को आपके चरणों में जगह दी साथ ही साथ बिन मांगे ही जो उपकार किया उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद। हे भगवन आपको पता है मैं अपने पैरों से चल नहीं सकता।ऐसे में आपकी सेवा कैसे करूं,आपकी किरपा से मुझे कोई दुख नहीं है,बस एक यही दुख है कि कोनसा पाप किया होगा जो मेरे प्यारे आचार्य की सेवा नहीं कर सकता।हे भगवन मुझ पापी को कभी भी आपके चरणों से दूर मत करना ।बहुत बहुत धन्यवाद प्रभु जी, मैं बता नहीं सकता कितना अच्छा महसूस हो रहा है,आपने कैसे नरक से निकाला वो तो आप ही जानो।कोटि कोटि प्रणाम आचार्य जी।पता नहीं मुझे क्या हो जाता है आपके सामने तो कुछ बोल नहीं पाता बस आंसू ही निकलते है सोचा आज बहुत दिन हो गए कुछ लिखकर ही बताया जाए।आपका बेटा
Swami Ramswarup: Bahut bahut aapko mera aashirwad, beta.