जो भी यज्ञ करता है उसको ईश्वर सारे सुख देता है। इसलिए ईश्वर ने यह प्रार्थना बनाई है कि हे मनुष्य! मुझसे रोज प्रार्थना करो कि – हे प्रभु! हमें यज्ञ की प्रेरणा दे। भगवान ने कहा कि यज्ञ से श्रेष्ठ कर और कुछ भी नहीं है। हर चीज से, हर पल से, बड़े ऊंचे ऊंचे पद के...
गुप्त: गुरुजी को दंडोत्वत चरण स्पर्श! क्या परिस्थिति या हालत व्यक्ति को मजबूर कर सकते हैं? सुना है इन्सान परिस्थिति और हालत का दास होता है। क्या यह सही है? मेरा लक्ष्य कर्ज निवारण हेतु इनसे जुझता और सामना करता रहा और वैदिक पूजा भी करता रहा। आपकी कृपा से अंतोगत्व...
Deepak Kumar: चरण स्पर्श, नमस्ते। एक बार आपने कहा था कि शेयर मार्केट का काम नहीं करना चाहिए लेकिन अगर किसी को फायदा होता रहे तो क्या वह ठीक है? जैसे एक मित्र का वही काम है। शेयर मार्केट में ही डीलिंग करता है लेकिन वह शेयर खरीद कर invest कर देता है और जब उसको प्रॉफिट...
DSS: गुरुजी को मेरा दंडोत्वत चरण स्पर्श। स्वामी जी मैं आपका तहेदिल से स्वागत करता हूँ और आपको ही विश्व का चक्रवर्ती राजा मानता हूँ क्योंकि राजा में आप जैसे गुण होने चाहिए। वो आज देखने को दूर-दूर तक नहीं मिलते। यदि किसी नेता से अगर बात होती है वेदों के प्रचार वास्ते तो...
पृथिवी पर हर समय एक यथार्थ वक्ता की आवश्यकता है। यथार्थ वक्ता का मतलब है कि जो जैसा है वैसा ही बोलना। इसमें प्रमाण यही है कि ईश्वर जैसा है वैसा ही बोलो। अपनी मर्जी से क्यों बोलते हो? वेदों में ईश्वर का जैसा वर्णन है वही बोलो। वह जो बोलेगा और जो वेदों को सुनेगा...