Brief Notes from Yajyen – July 03, 2020

ऋषियों की उत्तम अवस्था के दर्शन से कई जन्मों के पाप मिट जाते हैं।  ओ३म् उतो पितृभ्यां प्रविदानु घोषं महो महद्भ्यामनयन्त शूषम्।  उक्षा ह यत्र परि धानमक्तोरनु स्वं धाम जरितुर्ववक्ष॥ (ऋग्वेद मंत्र ३/७/६) हे मनुष्य! जैसे यह ब्रह्मचारी लोग अपने आचार्य की सेवा...

यज्ञ सर्वश्रेष्ठ शुभ कर्म

स्वामी राम स्वरूप जी, योगाचार्य, वेद मंदिर (योल) (www.vedmandir.com) ऋग्वेद मंत्र १/२२/१५ का भाव है कि ईश्वर ने यह पृथिवी मनुष्यों को अनेक प्रकार के सुख देने के लिए बनाई है जिसमें दुःख देने वाले कांटे आदि भी न हों। और यह पृथिवी हमें बहुत से रत्नों को प्राप्त कराने...