Anonymous: What is the meaning of First Mantra of Atharvaved i.e 1/1/1? Can I put aahutis of it?

Swami Ram Swarup: महत् तत्त्व,अहंकार और पाँच तनमात्राएँ, ये सात तत्त्व है जिनसे संसार के सब रुप बनते हैं क्योंकि इनका निर्माण प्रकृति के तीन गुणों से होता है। इसलिए रजस, सत्व और तमस, ये प्रकृति के तीन गुणों के भेद से महत्, अहंकार और पाँच तनमात्राएँ तीन-तीन प्रकार के हैं। (त्रिशप्थह) इस तरह 3×7=21 तत्त्व हैं। (विश्वारुपानी बिभ्रत:) ये सब रुपों को धारण करते हुए (परियन्ति) चारों ओर गति करते हैं अर्थात सर्वत्र है। (वाचस्पति:) अर्थात सम्पूर्ण वेदों का स्वामी, आचार्य (तेशाम) ऊपर कहे उन 21 तत्त्वों के (तन्व:) शरीर सम्बंधी (बला) अर्थात शक्तियों को (अद्या) अर्थात आज (मे दधातु) मुझ में धारण करें।

भाव: भाव यह है कि 21 तत्त्वों का ज्ञान आचार्य कृपा करके आज ही मुझे दे दें। इस ज्ञान को प्राप्त करके हम अपने शरीर एवं स्वास्थ्य की रक्षा करने में समर्थ होंगे।

Yes, you can offer the aahuti of this mantra, first to pray to Acharya to know about 21 tatva so that we can acquire the power of mind, body and soul. To overcome fear Yajyen and blessings of Acharya are necessary. Daily agnihotra and daily practice of Ashtang Yog also helps to overcome the fear of death and any other kind of fear.

Arvind R: Thank you Swamiji for your pains taken to answer my question.

Swami Ram Swarup: You are always welcome, beta.

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