Swamiji is sitting in merriment on March 19, 1979

वेद मंदिर, योल में सन् १९७८ से ४-६ बार वेद मंत्रों के उच्चारण से विधिपूर्वक प्रतिदिन यज्ञ किया जाता है। प्रतिवर्ष अप्रैल से जून के आखिरी हफ्ते तक चारों वेदों का अनुष्ठान प्रवचन सहित किया जाता है। ज्ञिज्ञासुओं को अष्टांग योग विद्या की शिक्षा स्वयं स्वामी राम स्वरूप जी महाराज जी देते हैं। स्वामी जी ने सभी को प्रतिदिन सुबह और शाम हवन करने की प्रेरणा दी है जिस अग्निहोत्र/यज्ञ करने की आज्ञा ईश्वर ने वेदों में दी है। स्वामीजी के सभी शिष्य नित्य अग्निहोत्र करते हैं। स्वामी जी का बरसों से कहना है कि यदि वेदमंत्रों से पूरी आहुतियाँ डालनी संभव न हों तो गायत्री मंत्र या ओ३म् स्वाहा से भी आहुति डालकर वातावरण को शुद्ध करें, बीमारियाँ भगाएँ तथा ओ३म् तथा स्वाहा दोनों ईश्वर के नाम हैं इन्हें बोलकर नित्य ईश्वर का नाम लेकर अपना और दूसरों का जीवन धन्य करें।

In Ved Mandir, Yol, since 1978, Yajyen is performed 4-6 times daily with the chanting of Ved mantras as per the Vedic procedure. Every year from April to the end of June, anushthaan (Vedic ritual) of four Vedas is done with offerings and preachings of mantras. Swami Ram Swarupji Maharajji also gives knowledge of Ashtang Yog to aspirants. Swamiji has inspired everyone to do havan every morning and evening, the order for performing the same havan/Yajyen is given by God in Vedas. All the disciples of Swamiji perform havan daily. Swamii has said for many many years that if it is not possible to put complete aahutis then you can put aahutis by Gayatri mantra or Om Swaha and purify the environment and remove diseases. And, both Om and Swaha are the names of God, by reciting the same, daily chant the name of God and make yours and others’ life blessed.

Ved Mandir

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