नाकस्य पृष्ठे – मोक्ष के आनंद का अनुभव करो।  प्रश्न यह आ जाता है कि मोक्ष कब और कैसे मिलेगा।  यह पूर्णिमा और अमावस्या के यज्ञ मोक्ष के लिए गारंटी देते चले जाते हैं। यज्ञों का जीवन में ध्यान रखना है। और 60 साल के बाद बहुत ज्यादा ध्यान रखना है।  जब तक आचार्य है तब तक इन आहूतियों का बड़ा ध्यान रखो।  यह दुखों का नाश करती हैं। अगर श्रद्धा से आहुति डाली है और श्रद्धा से सेवा दी हुए हैं तो ये मोक्ष तक दे देती हैं।

(रयिं ददातु) – धन देने आती हैं और (अक्षितं) कभी नष्ट हो ऐसा धन देने आती हैं। विद्या वो है जो कभी नष्ट नहीं होती है।  पूर्णिमा विद्या देने आती है और भौतिक धन भी देने आती है। सुकृतः लोक व नाके में  मोक्ष है।  जो लोग पाप छोड़कर मेहनत की कमाई और यज्ञ में लगते हैं और समाधिस्त विद्वान् की सेवा में लगते हैं में लगते हैं, तो तारना चाहे तो उसको विद्वान् अपनी विद्या और अपने आशीर्वाद से तार देता है। ऐसा चारों वेद कहते हैं। ईश्वर उपदेश नहीं करता गुरू ही करता है।  योगी, तपस्वी, समाधिस्त पुरुष ही तुम्हें ज्ञान देंगे।  यह सारी बात आप अपने हृदय में रखें और सच्ची भक्ति करके अपने जीवन को सफल करें, नहीं तो मोह माया के चक्कर में, काम क्रोध आदि में अनंत योनि में भटकना पड़ता है। (मृत्यु संसार सागरात्)

तो गुरू से विद्या सुनते हो, भक्ति करते हो, तर जाओगे। महाभारत काल तक सब ठीक था। आज सब जगह भौतिकवाद है। आप लोगों में जो भी (वेद मार्ग पर चलते) हैं, यह ईश्वर और गुरू की देन है।

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