आयुर्यज्ञेन कल्पतां (यजुर्वेद १८/२९) आयु यज्ञ से बढ़ती है। यह basic principle (मौलिक सिद्धांत) है। आप लोगों के यज्ञ कर्म कभी मिथ्या नहीं जाएंगे। किया हुआ कर्म कभी मिथ्या नहीं जाएगा। शिष्यों को ध्यान में रखना चाहिए कि अभी गुरु का जीवन यज्ञ, शिक्षा, आशीर्वाद और ईश्वर के अलावा कुछ नहीं है। गुरु के बेटा बेटी शिष्य ही हैं। वही तो गुरु को वृद्धावस्था में संभालते हैं।
Recent Posts
- Secrets of the Vedas & Prakriti – Sanatan Wisdom for Modern Life
- Vedas & Prakriti: The Divine Cycle of Creation and Destruction
- कैसे बच पाएंगे आधिदैविक ताप से (बाढ़, भूकंप, बादल फटना इत्यादि)
- Secrets of the Vedas & Prakriti
- क्या मात्र नाम सिमरन से जीव तर जाएगा?
- Questions & Answers – March 19, 2025
- Questions & Answers – March 18, 2025
- Questions & Answers – March 17, 2025
- Questions & Answers – March 16, 2025
- Questions & Answers – March 15, 2025