विश्व में बढ़ते हुए आतंकवाद पर लगाम लगाने में अमरीका, फ्रांस, ब्रिटेन, रूस जैसी महान शक्तियों की विफलता मन में बेचैनी सी पैदा करती है। हां! यह तो निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि आईएसआईएस के कई ठिकाने ध्वस्त हुए हैं। किसी हद तक उनके पर कुतरे भी गए हैं, परंतु उनके क्रूर एवं निर्दयी दस्तों को पूर्णतया विराम न लगाने के कारण नित्य बेकसूर लोग उनके हाथों बेरहमी से प्राण गंवा रहे हैं। जन्म और मृत्यु का नियंत्रण तो केवल परमेश्वर के हाथ में ही कहा गया है। लेकिन जबसे उग्रवाद के विषैले खूनी पंजे जनता पर अचानक प्रहार करने लगे हैं, तो विद्वान यह सोचने पर मजबूर हो गए हैं कि जहां परमेश्वर तो कर्मानुसार मृत्यु प्रदान करता है, वहां ये उग्रवादी कब, कहां और कैसे बेकसूरों को मृत्यु के घाट उतार देते हैं, इसका कोई पता नहीं चलता।

फ्रांस में भी बेकसूर जनता के साथ आईएसआईएस ने जो मृत्यु का ताडंव दिखाया है, उसकी जितनी भी निंदा की जाए, वह कम है। फ्रांस के नीस शहर में जब जनता ‘नेशनल डे’ को हर्षोल्लास और उमंग से मना रही थी, तभी अचानक इस भीड़ पर एक सनकी आतंकी ने बेरहमी से ट्रक चढ़ा दिया। राक्षसवृत्ति की कोई हद नहीं होती। इसका उदाहरण यह है कि इन बेकसूरों को मारने के बाद आईएसआईएस के उग्रवादियों ने खुशी का जश्न भी मनाया। चश्मदीद गवाह के अनुसार उग्रवादियों ने ट्रक में से पिस्टल से गोलियां भी चलाईं। ट्रक में हथियार एवं ग्रेनेड लदे हुए थे।

लगभग आठ महीने में तीसरी बार फ्रांस पर यह बड़ा हमला किया गया। इस हमले के मद्देनजर भारतवर्ष में भी हाई अलर्ट लागू किया गया है। भारत में हैदराबाद से पकड़े हुए उग्रवादियों ने यह खुलासा भी किया है कि उग्रवादियों की नजर अजमेर शरीफ को नष्ट करने पर टिकी थी। जहां सभी मजहबों एवं ईश्वर से उत्पन्न वेदवाणी में प्रत्येक नर-नारी को उपदेश दिया जाता है कि वे पृथ्वी पर शांति कायम करने के लिए नित्य खुदा/परमात्मा की पूजा करें, इंद्रियों पर संयम रखें, माता, बहन-बेटियों की इज्जत करें, विश्व में भाईचारा बढ़ाएं, हिंसा से दूर रहें, किसी का दिल न दुखाएं इत्यादि। इस विषय में कुरान शरीफ में भी स्पष्ट कहा-

‘दुनिया एक इबादत गाह है और इसका हर काम इबादत है।’

अर्थात यह सारा संसार खुदा का पूजा स्थल है। इसमें प्रत्येक शुभ कार्य खुदा/परमेश्वर की पूजा है, परंतु उग्रवाद मजहब एवं इनसानियत से परे अपने अलग ही खुद के नियम बनाकर चलता है। अगर ऐसा नहीं है तो वह खुदा की दी इस जमीन को, जिस पर इनसानों के लिए परोपकार एवं शुभ कार्य करके खुदा की पूजा की जाती है, बेकसूरों के खून से रंग कर अपवित्र न करता। यदि उग्रवाद एक देश की समस्या होती, तब तो उसी एक देश के राजा का कर्त्तव्य था कि उग्रवाद को अपने सामर्थ्य से उखाड़कर फेंके। जैसा कि यजुर्वेद मंत्र 11/14 एवं 15 में कहा-

Published in Divya Himachal, July 18, 2016, Click upon the link below for the complete article:
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