आर्य विनोद : गुरुजी , आत्मीय नमन – वन्दन- चरण वंदन l 1. आजकल विद्यालय मे सबसे पहले जाते ही बालक – बालिकाएं प्रार्थना करते है , प्राचीन काल की तरह वहाँ कोई यज्ञ – हवन नही होता तो क्या वहाँ की जाने वाली समस्त प्रार्थनाएं ईश्वर स्वीकार नही करता , क्योंकि जैसा की आपने बताया की ईश्वर तो सिर्फ यज्ञ – हवन मे हमारी कामनाये पूर्ण करता है l

2. या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवै: सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती नि:शेषजाड्यापहा l

उपर्युक्त प्रार्थना अवैदिक है , मेरी बेटी जिस स्कूल मे पढ़ती है , वहाँ यह प्रार्थना बुलवाते है , तो क्या इसका कोई कुसंस्कार उस पर पड़ेगा , वैसे वह इसका कोई अर्थ नही जानती है l
Swami Ramswarup: Aashirvaad beta. Haah yeh to bilkul thik hai ki jo Vedic marg par nahin chalta to uski prarthna Ishwar sweekar nahin karta. Doosra yeh bhi hai ki keval prarthna karne mein kuch nahin yadi prarthna ke anukul purusharath nahin kiya jaaye.

Ismein koi shak nahin ki yah prarthna ved viruddh hai parantu bhautik shiksha lene ke liya yadi kanya school mein uccharan karti hai to koi baat nahin.